इस छोटे से जीवन में, कुछ दीवारों और एक छत में!
बना दो मुझे कुछ थोडा सा नक्शा!
कुछ हैं ज़रूरतें मेरी! एक दो है शौंक!
रोड़ी को तुम देना छान, सीमेंट का लगा दो छौंक!
सर्दियों में आवे धूप, गर्मियों मैं आवे छाँव!
शहरों में प्रदूषण है, तभी तो लिया है गाँव!
अच्छा हाँ! एक चीज़ का ज़रूर रखना ध्यान!
घना बढ़िया दिखना चाहिए अपना मकान!
सोच रहा हूँ की और क्या काम है! हां!
चढ़ते चढ़ते न हो थकान! जीना इसी का नाम है!
बाकी और करूँगा फ़ोन! उसको मत तुम रखना मौन!
ईमेल न आवे मने! बढ़िया सी लगाना रिंगटोन!
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